K. Jayaganesh IAS Officer Interview in Hindi के. जयगनेश आईएएस टॉपर

 

K. Jayaganesh IAS Officer के. जयगनेश आईएएस टॉपर रैंक १५६ साक्षात्कार यूपीएससी परीक्षा (Interview UPSC Exam)

 

 

के. जयगनेश की कहानी,एक कहावत “ तब तक प्रयास करो जब तक तुम सफल नहीं होते ” के लिए एक आदर्श उदाहरण है | वह सिविल सेवा की परीक्षा में ६ बार असफल हुए , मगर उन्होंने ने हिम्मत नहीं हारी | उनका ७ वी बार कि परिक्षा उनका अंतिम मौका था , लेकिन इस बार भाग्य काम कर गया | उनको AIR १५६ मिला और उनको भारतीय प्रशाशनिक सेवा के लिए चुना गया |

जयगनेश तमिलनाडू के एक बहोत ही गरीब परिवार से थे | हालाँकि उन्होंने ने इंजिनियर होने के लिए पढाई कर रहे थे , लेकिन वे थोडा अजीब काम करते थे, कभी कभी एक लेखक के रूप में कम करते समय वे IAS को अपना सपना बना लिया | जयगानेश वेल्लोर के एक छोटे से गाव में पीला बढ़े उन्हें सब विनावमंगलम कहते बुलाते थे | उनके पिता जी चमड़े की एक फैक्ट्री में कम करते थे | उनके पिता जी ने सिर्फ १० वी तक पढाई किया था | उनकी माँ एक गृहिणी थी | जयगनेश अपने भाई बहनों में सबसे बड़े थे और उनकी दो छोटी बहनें और एक भाई था | जयगनेश ने अपने गाँव में ८ वी तक पढाई की और बाकी स्कूल की पढाई पास के एक गाँव से की |

वे पढाई में  हमेशा से बहोत अच्छे थे और हमेशा अपनी पहले स्थान पर आते थे | अपने जीवन में उनका एक ही लक्ष्य था की जल्दी से जल्दी कोई नौकरी पाना और अपने पिता जी की मदत करना |

१० वी की परीक्षा पास करने के बाद वे पॉलिटेक्निक कॉलेज के लिए गए , जहा उन्हें पता चला की जैसे ही वे इसको पास करते है उनके नौकरी तुरंत मिल जाएगी | वहा पर वे ९१% से पास हुए और उन्हें सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेने का मौका मिला | फिर वह उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग किया | उनके पिता जी ने उनको हमेशा उनको पढाई के लिए प्रोत्साहन दिया |

उनको ने अपनी इंजीनियरिंग २००० में पास कर लिया , फिर वे नौकरी के लिए  बेंगलोर गए | वह उन्हें बिना परेशानी के २५०० रुपये की नौकरी मिल गयी | जब वे बेंगलोर में थे तब वे हमेशा अपने गाँव की दयनीय स्थिति के बारे में सोचा करते थे | वे अपने गाँव वालो की मदत करना चाहते थे |

IAS अधिकारी बनने की चाह में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और परीक्षा की तयारी करने के लिए अपने गाँव वापस आ गए | उनके पिता जी तहे दिल से उनकी तयारी के लिए किताबे लेने और प्रकार की मदत की | पूरी तरह से ज्ञान ना होने के कारण पहले दो प्रयास में वे अपनी दो प्रारंभिक परीक्षा पास करने में असफल रहे |

उमा सूर्य के मार्गदशन पे उन्होंने ने वैकल्पिक विषय में समाजशास्त्र लिया लेकिन वे फिर से असफल रहे | उमा सूर्य खुद भी UPSC परीक्षा की तयारी कर रही थी |

फिर उन्हें पता चला की चेन्नई में एक सरकारी कोचिंग है | फिर उन्होंने उस कोचिंग की प्रवेश परीक्षा को पास किया और कोचिंग में प्रवेश ले लिया | वह पर उनको रहने के लिए आवस और खाने के लिए भी दिया जाता था | परीक्षा ख़तम होने के बाद बाद वे कमरे को खली करना चाहते थे | उसके बाद उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास किया और कमरे को खली करने को सोचा लेकिन उन्होंने ने चेन्नई में ही रहने का निश्चय किया | फिर उन्होंने छोटा सा नौकरी करने का फैसला किया | आख़िरकार उन्हें कैंटीन में बीलिंग क्लार्क का कम मिल गया उसमे भी कभी कभी उन्हें सेवा करना भी पड़ता था | फिर उन्होंने वापस से पढाई शुरू की लेकिन ५ वें प्रयास में वे वापस असफल रहे  | फिर से उन्होंने ने प्रारंभिक और मुख्या परीक्षा पास किया लेकिन साक्षात्कार में असफल रहे |

वे अभी तक हिम्मत नहीं हारे थे  यह उनका अंतिम प्रयास था | इस बार उन्होंने कठिन परिश्रम किया और अपने प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाओ में पास हुए | उनका साक्षात्कार दिल्ली में था | अपने साक्षात्कार में उन्हें एक शास्त्रीय भाषा के रूप में राजनीति और सिनेमा, कामराज, पेरियार, तमिल के बीच की कड़ी के बारे में पूछा गया था।

अंत में परिणाम आ गया | वास्तव में वह क्षण उनके लिए उड़ते रंगों भरा था और इस बार उन्होंने पुरे ७०० उम्मीदवारों में से १५६ वा अंक हासिल किया | उन्होंने हमेशा अपने सपने को ले कर अपने आप पर विश्वास रखा |

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